Sawaal

Amazing Poetries, Gazals, Panktiyaan.....by none other than Vishesh :)
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Vishesh
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Sawaal

Postby Vishesh » Fri Feb 03, 2012 7:48 pm

जिन ज़ख्मों का मरहम नहीं उनकी दवा क्यूँ करते है?
जिनसे उम्मीद नहीं होती वो अक्सर दगा क्यूँ करते है?

जब ज़न्नत कहते है बहुत हसीन है इस दुनिया से,
फिर जाने वाले को हम रोते रोते रवां क्यूँ करते है?

कभी फ़ुरसत मिले किसी को तो उन बेवफ़ाओं से पूछो,
तोडना ही है जिन ख्वाबों उनको जवाँ क्यूँ करते है?

हर ग़म फना करती है शराब कहते है पीनेवाले फिर,
लोग ऐसी खुशनुमा चीज़ को बदनाम भला क्यूँ करते है?

मिटा भी तो मैं अमर हो जाऊंगा ये जानते है सब,
अब समझे दुश्मन मेरी सलामती की दुआ क्यूँ करते है।
urvish

Gituli
Traveller
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Location: Odisha, India

Re: Sawaal

Postby Gituli » Fri Feb 03, 2012 8:41 pm

Too good :) :)
Awesome lines.....
Vishesh wrote:जिन ज़ख्मों का मरहम नहीं उनकी दवा क्यूँ करते है?
जिनसे उम्मीद नहीं होती वो अक्सर दगा क्यूँ करते है?

Vishesh wrote:मिटा भी तो में अमर हो जाऊंगा ये जानते है सब,
अब समझे दुश्मन मेरी सलामती की दुआ क्यूँ करते है।
...It's All In the Mind...

Mari
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Re: Sawaal

Postby Mari » Sun Feb 05, 2012 11:54 pm

:) :) very very nice :) another great one from you :) जिन ज़ख्मों का मरहम नहीं उनकी दवा क्यूँ करते है?
जिनसे उम्मीद नहीं होती वो अक्सर दगा क्यूँ करते है? beautiful lines yaar :)


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